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सुबह उठने की मस्नून दुआ – अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और सही हदीस Reference | Rahmat Ki Dua
इस्लाम में नींद से जागने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करना एक खूबसूरत सुन्नत है। रसूलुल्लाह ﷺ ने नींद से जागने के बाद पढ़ने के लिए एक छोटी और आसान दुआ सिखाई है।
इस दुआ में अल्लाह की हम्द और शुक्र किया जाता है कि उसने हमें नींद के बाद दोबारा जीवन और जागने की अवस्था प्रदान की। यह दुआ सहीह हदीस में वर्णित है।
अरबी दुआ
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
हिंदी उच्चारण
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अह्याना बअ्दा मा अमातना व इलैहिन-नुशूर।
हिंदी अर्थ
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जिसने हमें मौत जैसी नींद के बाद ज़िंदा किया और उसी की ओर लौटकर जाना है।
इस दुआ में इंसान अल्लाह का शुक्र अदा करता है कि उसने उसे एक और दिन जीवन बिताने का अवसर दिया।
दुआ कब पढ़ें
यह दुआ नींद से जागने के बाद पढ़ी जाती है।
नींद से जागने के बाद यह दुआ पढ़ना मस्नून है। हदीस में नबी ﷺ के नींद से जागने के बाद यह दुआ पढ़ने का उल्लेख मिलता है। इसलिए इसे जागने के बाद पढ़ना मस्नून अमल है।
हदीस Reference
इस दुआ का उल्लेख सहीह अल-बुखारी में हज़रत हुज़ैफ़ा رضي الله عنه से रिवायत के माध्यम से मिलता है।
सहीह अल-बुखारी: 6312
हदीस में वर्णित है कि नबी ﷺ जब नींद से जागते तो यह दुआ पढ़ते थे।
इसी दुआ का उल्लेख सहीह अल-बुखारी 6324 में भी मिलता है।
एक अन्य संदर्भ: सुनन इब्न माजह 3880 में भी यह दुआ हज़रत हुज़ैफ़ा رضي الله عنه से वर्णित है।
नोट: इस दुआ के लिए किसी खास फ़ज़ीलत का दावा करने के बजाय उतना ही बताया गया है जितना प्रमाणित हदीस से साबित है।
FAQ
सुबह उठने की मस्नून दुआ क्या है?
सुबह या नींद से जागने के बाद पढ़ी जाने वाली मस्नून दुआ है:
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
सुबह उठने की दुआ किस हदीस में है?
यह दुआ सहीह अल-बुखारी 6312 में वर्णित है।
क्या यह दुआ हिंदी में पढ़ सकते हैं?
दुआ को सही अरबी उच्चारण के साथ पढ़ना बेहतर है। समझने के लिए हिंदी उच्चारण और अर्थ की सहायता ली जा सकती है।
यह दुआ कब पढ़नी चाहिए?
नींद से जागने के बाद इसे पढ़ना मस्नून है।
क्या यह दुआ केवल सुबह के समय पढ़ी जाती है?
हदीस में नींद से जागने के बाद इसे पढ़ने का उल्लेख है। इसलिए इसे केवल सुबह तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
नींद से जागने के बाद यह छोटी सी मस्नून दुआ पढ़ना अल्लाह का शुक्र अदा करने का खूबसूरत तरीका है। इसे याद करना आसान है और इसका अर्थ भी बहुत गहरा है।
हर दिन जागने के बाद इस सुन्नत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाने की कोशिश करें और अल्लाह का शुक्र अदा करें।
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