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जुमे की फ़ज़ीलत: शुक्रवार की अहमियत, आमाल और हदीस Reference | Rahmat Ki Dua

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 इस्लाम में जुमे का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। जुमे को अरबी में यौमुल जुमुआ कहा जाता है। यह दिन मुसलमानों के लिए इबादत, अल्लाह की याद, दुआ और नेक कामों का विशेष अवसर है। अल्लाह तआला ने कुरआन में जुमे की नमाज़ के लिए पुकारे जाने पर अल्लाह की याद की ओर बढ़ने और व्यापार छोड़ने का आदेश दिया है। इससे इस दिन की अहमियत स्पष्ट होती है। जुमे के दिन मुसलमान जुमे की नमाज़ अदा करते हैं, खुतबा सुनते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और अल्लाह से अपनी जरूरतों के लिए दुआ माँगते हैं। जुमे के दिन पढ़ने के लिए दुआ जुमे के दिन अल्लाह से रहमत, मग़फ़िरत और हिदायत माँगना अच्छा अमल है। नीचे एक सामान्य दुआ दी गई है। इसे जुमे के लिए विशेष रूप से निर्धारित दुआ न समझें। अरबी दुआ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ हिंदी उच्चारण रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या हसनतंव वफ़िल आख़िरति हसनतंव वक़िना अज़ाबन्नार। हिंदी अर्थ ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई प्रदान कर, आख़िरत में भी भलाई प्रदान कर और हमें आग के अज़ाब से बचा। कुरआन संदर्भ: सूरह अल-बक़रह, 2:201। जुमे की फ़ज़ीलत औ...

शाम के अज़कार: अरबी दुआ, हिंदी उच्चारण और फ़ज़ीलत | Rahmat Ki Dua

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  इस्लाम में अल्लाह का ज़िक्र करना और उससे दुआ माँगना एक महत्वपूर्ण इबादत है। शाम के अज़कार वे ज़िक्र और दुआएँ हैं जिन्हें मुसलमान दिन के अंत में पढ़ते हैं। शाम के अज़कार में अल्लाह की प्रशंसा, उसकी नेमतों का शुक्र और उससे भलाई तथा सुरक्षा की दुआ शामिल है। इन अज़कार को नियमित रूप से पढ़ने से इंसान को अल्लाह की याद में रहने और अपनी इबादत की आदत बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इस लेख में शाम के अज़कार की एक प्रमाणित दुआ, उसका अरबी पाठ, हिंदी उच्चारण, अर्थ और प्रामाणिक हदीस का संदर्भ दिया गया है। शाम के अज़कार की अरबी दुआ दुआ: أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ. اللَّهُمَّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذِهِ اللَّيْلَةِ وَخَيْرَ مَا بَعْدَهَا، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ هَذِهِ اللَّيْلَةِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهَا، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَسُوءِ الْكِبَرِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابٍ فِي النَّارِ وَعَذَابٍ فِي الْقَبْ...

सुबह के अज़कार: अरबी दुआ, हिंदी उच्चारण और अर्थ | Rahmat Ki Dua

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 सुबह के अज़कार (أذكار الصباح) वे दुआएँ और ज़िक्र हैं जिन्हें मुस्लिम दिन की शुरुआत में अल्लाह को याद करने के लिए पढ़ते हैं। इनमें अल्लाह की तारीफ़, उससे माफ़ी माँगना और उसकी मदद व हिफ़ाज़त की दुआ करना शामिल है। कुरआन में अल्लाह तआला ने सुबह और शाम उसका ज़िक्र करने की हिदायत दी है। सूरह अल-अहज़ाब, आयत 41–42 में ईमान वालों को अल्लाह का खूब ज़िक्र करने और सुबह-शाम उसकी तस्बीह करने का निर्देश दिया गया है। सुबह के अज़कार को अपनी रोज़ाना की इबादत का हिस्सा बनाएँ और दुआओं के अर्थ को समझकर पढ़ने की कोशिश करें। सुबह के अज़कार की अरबी दुआएँ  नीचे कुछ प्रमुख सुबह के अज़कार अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और संदर्भ के साथ दिए गए हैं। 1. सूरह अल-इख़लास, अल-फ़लक़ और अन-नास सूरह अल-इख़लास — सूरह 112 بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ۝ اللَّهُ الصَّمَدُ ۝ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ۝ وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। कुल हुवल्लाहु अहद। अल्लाहुस्समद। लम यलिद वलम यू्लद। वलम यकुन लहू कुफुवन अहद। हिंदी अर्थ: अल्लाह के नाम से, जो ...

सूरह नास का अर्थ हिंदी में | अरबी, उच्चारण और फज़ीलत – Rahmat Ki Dua

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 सूरह अन-नास (Surah An-Nas) कुरआन मजीद की 114वीं और अंतिम सूरह है। इसमें कुल 6 आयतें हैं। इस सूरह में अल्लाह तआला से इंसानों के दिलों में बुरे विचार और वसवसे डालने वालों की बुराई से पनाह माँगना सिखाया गया है।  सूरह नास हमें याद दिलाती है कि अल्लाह ही हमारा पालनहार, बादशाह और सच्चा इबादत के योग्य माबूद है। एक मुसलमान इस सूरह को पढ़कर अल्लाह की पनाह माँगता है।  सूरह नास अरबी में                                          سُورَةُ النَّاسِ                          بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ۝١ مَلِكِ النَّاسِ ۝٢ إِلَٰهِ النَّاسِ ۝٣ مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ۝٤ الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ۝٥ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ ۝٦ स्रोत: कुरआन मजीद, सूरह अन-नास (114:1–6)। सूरह नास का हिंदी उच्चारण 1. क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन्नास। 2. मलिकिन्नास। 3. इलाहिन्नास। 4. मि...

सूरह फ़लक का अर्थ हिंदी में | अरबी, उच्चारण और फ़ज़ीलत – Rahmat Ki Dua

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 सूरह अल-फ़लक कुरआन मजीद की 113वीं सूरह है। इसमें कुल 5 आयतें हैं। यह सूरह अल्लाह तआला से हर प्रकार की बुराई से पनाह माँगने की शिक्षा देती है। इसमें रात के अँधेरे, जादू से जुड़ी बुराई और ईर्ष्या करने वाले की बुराई से अल्लाह की शरण माँगी गई है।  सूरह फ़लक का नियमित पाठ मुसलमानों के सुबह-शाम के अज़कार और सोने से पहले पढ़े जाने वाले अमल में शामिल है। सूरह फ़लक अरबी में                                            سُورَةُ الْفَلَقِ बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ۝١ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ ۝٢ وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ۝٣ وَمِنْ شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ ۝٤ وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ۝٥ हिंदी उच्चारण 1. क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल-फ़लक़। 2. मिन शर्रि मा ख़लक़। 3. वमिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब। 4. वमिन शर्रिन्नफ़्फ़ासाति फ़िल उक़द। 5. वमिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद। नोट: इसे सरल सहायक पाठ के रूप में रखें और स्पष्ट करें कि सही तजवीद सीखने क...

सूरह इख़लास का अर्थ हिंदी में, अरबी पाठ और फ़ज़ीलत Rahmat Ki Dua

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 सूरह इख़लास कुरआन शरीफ़ की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सूरह है। इसमें बताया गया है कि अल्लाह एक है, वह किसी का मोहताज नहीं है, न उसकी कोई संतान है और न वह किसी की संतान है। इस सूरह में अल्लाह की महानता और उसकी अद्वितीयता का स्पष्ट संदेश मिलता है। इसे सही उच्चारण के साथ पढ़ना और इसके अर्थ को समझना हर मुसलमान के लिए लाभदायक है। सूरह इख़लास अरबी में                              سُورَةُ الْإِخْلَاصِ                   بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत कृपाशील, बहुत दयावान है। قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ. ۝١  اللَّهُ الصَّمَدُ ۝٢ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ۝٣ وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ ۝٤ हिंदी उच्चारण 1. क़ुल हुवल्लाहु अहद। 2. अल्लाहुस्समद। 3. लम यलिद व लम यूलद। 4. व लम यकुल्लहू कुफुवन अहद। ध्यान दें: हिंदी में लिखा उच्चारण अरबी की ध्वनियों का केवल अनुमानित रूप है। सही तिलावत के लिए अरबी पाठ के साथ किसी योग्य क़ारी से उच्चारण सीख...

सूरह अल-फ़ातिहा का अर्थ हिंदी में | अरबी, उच्चारण और तर्जुमा

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  सूरह अल-फ़ातिहा पवित्र कुरआन की पहली सूरह है। इसे फ़ातिहतुल किताब भी कहा जाता है। इसमें अल्लाह की प्रशंसा, उसकी रहमत, आख़िरत के दिन का ज़िक्र और सीधे रास्ते पर चलने की दुआ शामिल है। इस सूरह में बंदा अल्लाह की इबादत करने, उसी से मदद माँगने और सही रास्ते पर चलने की प्रार्थना करता है। सूरह अल-फ़ातिहा नमाज़ की महत्वपूर्ण सूरह है। इस लेख में आप सूरह अल-फ़ातिहा की अरबी आयतें, हिंदी उच्चारण, सरल हिंदी अर्थ और इससे संबंधित प्रामाणिक कुरआनी जानकारी पढ़ेंगे। बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम सहित بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ आयत 1 الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ आयत 2 الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ आयत 3 مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ आयत 4 إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ आयत 5 اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ आयत 6 صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ आयत 7  सूरह अल-फ़ातिहा का हिंदी उच्चारण 1. बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। 2. अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन। 3. अर्रहमानिर्रहीम। 4. मालिकी यौमिद्दीन। 5. इय्याका नअबुदु व इय्याका नस...

आयतुल कुर्सी का अर्थ, अरबी, हिंदी उच्चारण और पढ़ने का समय | Rahmat Ki Dua

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 आयतुल कुर्सी कुरआन मजीद की सूरह अल-बक़रह, आयत 255 है। इसमें अल्लाह तआला की महानता, उसकी एकता, उसके ज्ञान और उसकी पूर्ण शक्ति का वर्णन किया गया है। हदीस में आयतुल कुर्सी को कुरआन की महान आयत बताया गया है। इसलिए बहुत से मुसलमान इसे नियमित रूप से पढ़ते हैं। आयतुल कुर्सी का नाम इसमें आए शब्द “कुर्सी” से लिया गया है। इस आयत में अल्लाह के बारे में बताया गया है कि वह हमेशा जीवित और सबको संभालने वाला है तथा उसे न ऊँघ आती है और न नींद। आयतुल कुर्सी का अरबी पाठ आयतुल कुर्सी — सूरह अल-बक़रह 2:255 اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ संदर्भ: सूरह अल-बक़रह, 2:255। हिंदी उच्चारण अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवल-हय्युल-क़य्यूम। ला...

इस्तिग़फ़ार की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और सहीह हदीस Reference | Rahmat Ki Dua

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 इस्तिग़फ़ार का अर्थ है अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की माफी माँगना। एक मुसलमान के लिए अल्लाह से माफी माँगना महत्वपूर्ण इबादत है। रसूलुल्लाह ﷺ ने इस्तिग़फ़ार के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दुआ सिखाई, जिसे सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार (Sayyid al-Istighfar) कहा जाता है। सहीह अल-बुखारी में इसे इस्तिग़फ़ार की बेहतरीन दुआ बताया गया है। अरबी दुआ اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي، لَا إِلٰهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَىٰ عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ لَكَ بِذَنْبِي، فَاغْفِرْ لِي، فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ हिंदी उच्चारण अल्लाहुम्मा अंता रब्बी, ला इलाहा इल्ला अंता, ख़लक़्तनी व अना अब्दुका, व अना अला अहदिका व वअदिका मस्ततअतु, अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा सनअतु, अबूउ लका बिनिअमतिका अलय्या, व अबूउ लका बिज़म्बी, फ़ग़फ़िर ली, फ़इन्नहू ला यग़फ़िरुज़्ज़ुनूबा इल्ला अंता। नोट: हिंदी उच्चारण केवल अरबी पढ़ने में सहायता के लिए है। सही अरबी उच्चारण के लिए अरबी पाठ को देखकर किसी योग्य शि...

इस्तिखारा की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और पढ़ने का तरीका | Rahmat Ki Dua

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  जब किसी जायज़ काम के बारे में निर्णय लेने में व्यक्ति असमंजस में हो, तो वह अल्लाह से भलाई और सही मार्गदर्शन मांगने के लिए इस्तिखारा कर सकता है। इस्तिखारा में बंदा अल्लाह से यह दुआ करता है कि अगर कोई काम उसके दीन, दुनिया और भविष्य के लिए अच्छा है तो अल्लाह उसे आसान कर दे और उसमें बरकत दे। और अगर वह काम उसके लिए नुकसानदेह है तो अल्लाह उसे उससे दूर कर दे और उसके लिए बेहतर चीज़ निर्धारित करे। हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह رضي الله عنه से वर्णित है कि नबी ﷺ सहाबा को इस्तिखारा उसी तरह सिखाते थे जैसे कुरआन की सूरह सिखाते थे। अरबी दुआ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ، وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ۔ اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي، فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي، ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَم...

बीमार की अयादत की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण और अर्थ | Rahmat Ki Dua

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  इस्लाम में बीमार व्यक्ति की अयादत करना और उसके लिए दुआ करना एक अच्छी और नेक अमल है। रसूलुल्लाह ﷺ बीमार की अयादत करते और उसके लिए शिफ़ा की दुआ करते थे। बीमार की अयादत के समय पढ़ी जाने वाली एक मशहूर दुआ में अल्लाह से बीमारी दूर करने और शिफ़ा देने की प्रार्थना की जाती है। अरबी दुआ   أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفِيَكَ इसे 7 बार पढ़ने का उल्लेख हदीस में आया है। हिंदी उच्चारण अस्अलुल्लाहल-अज़ीम, रब्बल-अर्शिल-अज़ीम, अन यश्फियक। हिंदी अर्थ मैं महान अल्लाह, महान अर्श के रब से दुआ करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे। यह दुआ बीमार व्यक्ति के लिए अल्लाह से पूर्ण स्वास्थ्य और बीमारी से राहत माँगने की दुआ है। दुआ कब पढ़ें बीमार व्यक्ति की अयादत (मुलाकात) के समय यह दुआ पढ़ी जा सकती है। हदीस में बीमार व्यक्ति के पास यह दुआ 7 बार कहने का उल्लेख मिलता है। दुआ करते समय दिल में यह विश्वास रखना चाहिए कि असली शिफ़ा देने वाला केवल अल्लाह है। कुरआन/हदीस Reference इस विशेष दुआ का उल्लेख कुरआन की किसी आयत के रूप में नहीं, बल्कि हदीस में मिलता है। हदीस Reference: Collec...

छींकने की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण और अर्थ | Rahmat Ki Dua

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 इस्लाम में छींक आने पर अल्लाह की हम्द करना और दूसरे मुसलमान के लिए दुआ करना एक सुंदर इस्लामी आदाब है। हदीस में बताया गया है कि जब कोई मुसलमान छींकने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहे, तो उसे सुनने वाला मुसलमान उसके लिए यरहमुकल्लाह कहे। इसके बाद छींकने वाला व्यक्ति उसके लिए यहदीकुमुल्लाह व युस्लिहु बालकुम कहे। अरबी दुआ छींकने वाला व्यक्ति कहे: الْحَمْدُ لِلَّهِ सुनने वाला व्यक्ति कहे: يَرْحَمُكَ اللَّهُ इसके जवाब में छींकने वाला कहे: يَهْدِيكُمُ اللَّهُ وَيُصْلِحُ بَالَكُمْ हिंदी उच्चारण छींकने वाला: अल्हम्दुलिल्लाह सुनने वाला: यरहमुकल्लाह जवाब: यहदीकुमुल्लाह व युस्लिहु बालकुम हिंदी अर्थ अल्हम्दुलिल्लाह अर्थ: सभी तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं। यरहमुकल्लाह अर्थ: अल्लाह आप पर रहम करे। यहदीकुमुल्लाह व युस्लिहु बालकुम अर्थ: अल्लाह आपको हिदायत दे और आपके हालात को सुधार दे। दुआ कब पढ़ें जब किसी व्यक्ति को छींक आए और वह अल्हम्दुलिल्लाह कहे, तो पास मौजूद मुसलमान उसके लिए यरहमुकल्लाह कह सकता है। इसके बाद छींकने वाला व्यक्ति यहदीकुमुल्लाह व युस्लिहु बालकुम कहता है। यह तरीका नबी ﷺ की हदीस में वर्णित है...

बारिश की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण और अर्थ | Rahmat Ki Dua

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 बारिश अल्लाह तआला की एक बड़ी नेमत और रहमत है। जब बारिश होती है तो मुसलमान को अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और नबी ﷺ से साबित दुआ पढ़नी चाहिए। बारिश को देखकर नबी ﷺ यह छोटी और खूबसूरत दुआ पढ़ते थे: اللَّهُمَّ صَيِّبًا نَافِعًا अरबी दुआ اللَّهُمَّ صَيِّبًا نَافِعًا हिंदी उच्चारण अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफ़िअन हिंदी अर्थ ऐ अल्लाह! इसे लाभकारी बारिश बना दे। इस दुआ में बारिश से लाभ और भलाई की मांग की जाती है। दुआ कब पढ़ें यह दुआ बारिश होते समय या बारिश को देखते समय पढ़ी जा सकती है। हज़रत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णित है कि जब अल्लाह के रसूल ﷺ बारिश देखते तो यह दुआ पढ़ते थे। बारिश अल्लाह की रहमत है, इसलिए इस समय अल्लाह को याद करना और दुआ करना अच्छी बात है। कुरआन/हदीस Reference हदीस Reference सहीह अल-बुखारी, हदीस नंबर 1032 हज़रत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णित है कि जब अल्लाह के रसूल ﷺ बारिश देखते तो कहते: “صَيِّبًا نَافِعًا” अर्थात लाभकारी बारिश की दुआ करते थे। नोट: इस दुआ के लिए किसी कुरआनी आयत का reference देना आवश्यक नहीं है, क्योंकि यह दुआ हदीस से प्रमाणित है। FAQ बारिश की दुआ ...

सफर की दुआ – अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और हदीस Reference | Rahmat Ki Dua

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 इस्लाम में सफर के दौरान अल्लाह को याद करना और उससे आसानी, सुरक्षा तथा भलाई की दुआ करना सिखाया गया है। नबी ﷺ जब सवारी पर बैठते तो अल्लाह की नेमत को याद करते और सफर की दुआ पढ़ते थे। सफर की यह दुआ पढ़कर मुसलमान अल्लाह का शुक्र अदा करता है और अपने सफर को उसके हवाले करता है। अरबी दुआ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى، وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى، اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا، وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، اللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ، وَالْخَلِيفَةُ فِي الْأَهْلِ सवारी पर बैठने के समय कुरआन की ये आयतें भी पढ़ी जाती हैं: سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ ۝ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ यह आयतें सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़ 43:13–14 में हैं। हिंदी उच्चारण अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका फी सफरिना हाज़ल-बिर्रा वत्तक़्वा, व मिनल-अमलि मा तरज़ा। अल्लाहुम्मा हव्विन अलैना सफरना हाज़ा, वत्वि अन्ना बुअ्दहू। अल्लाहुम्मा अन्तस-साहिबु फिस-सफरि, वल-ख़लीफ़तु फिल-अहल। कुरआनी आयतों का उच्चारण: सुब्हानल्लज़ी सख़्...