घर में दाखिल होने की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और हदीस Reference | Rahmat Ki Dua

घर में दाखिल होने की दुआ – बिस्मिल्लाह और सलाम | Rahmat Ki Dua

इस्लाम में घर में दाखिल होते समय अल्लाह को याद करना और घरवालों को सलाम करना अच्छी और बरकत वाली सुन्नत है।

नबी ﷺ ने बताया कि जब कोई व्यक्ति घर में दाखिल होते समय अल्लाह का नाम लेता है और खाने के समय भी अल्लाह का नाम लेता है, तो शैतान के लिए उस घर में रात बिताने और खाना पाने की जगह नहीं रहती। यह बात सहीह मुस्लिम की हदीस में वर्णित है।

इसलिए घर में प्रवेश करते समय बिस्मिल्लाह कहना और घरवालों को सलाम करना एक महत्वपूर्ण इस्लामी आदाब है।


अरबी दुआ

घर में दाखिल होते समय

بِسْمِ اللَّهِ

इसके बाद घरवालों को सलाम करें:

السَّلَامُ عَلَيْكُمْ

घर में दाखिल होते समय अल्लाह का नाम लेना और घरवालों को सलाम करना इस्लामी आदाब में शामिल है।


हिंदी उच्चारण

बिस्मिल्लाह

अस्सलामु अलैकुम


हिंदी अर्थ

बिस्मिल्लाह का अर्थ है:

अल्लाह के नाम से।

अस्सलामु अलैकुम का अर्थ है:

आप पर सलामती हो।

घर में प्रवेश करते समय अल्लाह का नाम लेना और सलाम करना घर में इस्लामी आदाब और अल्लाह की याद को कायम करने का तरीका है।


दुआ कब पढ़ें?

घर में दाखिल होते समय:

1. दरवाजे से अंदर जाते समय बिस्मिल्लाह कहें।

2. घर में मौजूद लोगों को अस्सलामु अलैकुम कहकर सलाम करें।

3. खाने से पहले भी अल्लाह का नाम लें।

सहीह मुस्लिम की हदीस के अनुसार, घर में प्रवेश और खाना खाते समय अल्लाह का नाम लेने से शैतान को उस घर में ठहरने और भोजन में शामिल होने का अवसर नहीं मिलता।


कुरआन/हदीस Reference

 कुरआन

अल्लाह तआला फरमाता है कि जब तुम घरों में दाखिल हो तो एक-दूसरे को सलाम करो। सूरह अन-नूर, 24:61 में सलाम को अल्लाह की तरफ से मुबारक और पाकीज़ा अभिवादन बताया गया है।

 सहीह मुस्लिम

हज़रत जाबिर رضي الله عنه से रिवायत है कि नबी ﷺ ने बताया: जब व्यक्ति अपने घर में दाखिल होते समय अल्लाह का नाम लेता है और खाने के समय भी अल्लाह का नाम लेता है, तो शैतान कहता है कि उसके लिए न रात बिताने की जगह है और न खाना।

Reference: Sahih Muslim 2018a, Book 36, Hadith 136.

 एक जरूरी बात

घर में दाखिल होने के लिए मशहूर लंबी दुआ:

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ الْمَوْلَجِ...

Sunan Abi Dawud 5096 में मिलती है, लेकिन इस रिवायत को अल्बानी ने Da'if (कमज़ोर) दर्ज किया है। इसलिए इसे “सहीह/Authentic हदीस की दुआ” कहकर पेश करना उचित नहीं है।

इसी वजह से इस लेख में इसे authentic दुआ के रूप में शामिल नहीं किया गया है।


FAQ

क्या घर में दाखिल होते समय बिस्मिल्लाह कहना चाहिए?

जी हाँ। घर में दाखिल होते समय अल्लाह का नाम लेना सहीह हदीस से साबित है।

क्या घर में दाखिल होते समय सलाम करना चाहिए?

जी हाँ। कुरआन में घरों में दाखिल होते समय सलाम करने का निर्देश मिलता है।

क्या “अस्सलामु अलैकुम” घर में प्रवेश की दुआ है?

यह दुआ के बजाय सलाम है। घर में मौजूद लोगों को सलाम करना इस्लामी आदाब है।

क्या घर में दाखिल होने की लंबी दुआ पढ़ना जरूरी है?

नहीं। ऊपर बताई गई लंबी दुआ की रिवायत को अल्बानी ने कमजोर दर्ज किया है। इसलिए उसे अनिवार्य या authentic Sunnah कहना सही नहीं होगा।

घर में दाखिल होते समय सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है?

अल्लाह का नाम लेना और घरवालों को सलाम करना। सहीह मुस्लिम में घर में प्रवेश करते समय अल्लाह का नाम लेने की विशेष फज़ीलत का उल्लेख है।


निष्कर्ष

घर में दाखिल होना भी एक मुसलमान के लिए अल्लाह को याद करने का अवसर है। इसलिए घर में प्रवेश करते समय बिस्मिल्लाह कहना और घरवालों को अस्सलामु अलैकुम कहना अपनाएँ।

इस लेख में केवल वही बातें शामिल की गई हैं जिनके लिए विश्वसनीय इस्लामी स्रोत उपलब्ध हैं। कमजोर रिवायत को authentic बताने से बचना भी दीन की जानकारी साझा करने में जरूरी है।

अल्लाह हमें अपनी सुन्नतों पर अमल करने और सही दीन की बात दूसरों तक पहुँचाने की तौफीक़ दे। आमीन।

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