बीमार की अयादत की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण और अर्थ | Rahmat Ki Dua

 

बीमार की अयादत की दुआ – अरबी, हिंदी उच्चारण और अर्थ | Rahmat Ki Dua

इस्लाम में बीमार व्यक्ति की अयादत करना और उसके लिए दुआ करना एक अच्छी और नेक अमल है। रसूलुल्लाह ﷺ बीमार की अयादत करते और उसके लिए शिफ़ा की दुआ करते थे।

बीमार की अयादत के समय पढ़ी जाने वाली एक मशहूर दुआ में अल्लाह से बीमारी दूर करने और शिफ़ा देने की प्रार्थना की जाती है।


अरबी दुआ

  أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفِيَكَ

इसे 7 बार पढ़ने का उल्लेख हदीस में आया है।


हिंदी उच्चारण

अस्अलुल्लाहल-अज़ीम, रब्बल-अर्शिल-अज़ीम, अन यश्फियक।


हिंदी अर्थ

मैं महान अल्लाह, महान अर्श के रब से दुआ करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे।

यह दुआ बीमार व्यक्ति के लिए अल्लाह से पूर्ण स्वास्थ्य और बीमारी से राहत माँगने की दुआ है।


दुआ कब पढ़ें

बीमार व्यक्ति की अयादत (मुलाकात) के समय यह दुआ पढ़ी जा सकती है।

हदीस में बीमार व्यक्ति के पास यह दुआ 7 बार कहने का उल्लेख मिलता है।

दुआ करते समय दिल में यह विश्वास रखना चाहिए कि असली शिफ़ा देने वाला केवल अल्लाह है।


कुरआन/हदीस Reference

इस विशेष दुआ का उल्लेख कुरआन की किसी आयत के रूप में नहीं, बल्कि हदीस में मिलता है।

हदीस Reference:

Collection: Sunan Abi Dawud

Hadith: 3106

Narrator: अब्दुल्लाह इब्न अब्बास رضي الله عنهما

विषय: बीमार व्यक्ति की अयादत के समय उसके लिए दुआ

Authenticity: इस रिवायत को Sunnah.com पर अल्बानी के अनुसार Sahih दर्ज किया गया है।


एक और प्रमाणित दुआ

सहीह मुस्लिम में आयशा رضي الله عنها से वर्णित है कि नबी ﷺ बीमार की अयादत करते समय यह दुआ भी करते थे:

أَذْهِبِ الْبَاسَ رَبَّ النَّاسِ، وَاشْفِ أَنْتَ الشَّافِي، لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ، شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا

अर्थ: “ऐ लोगों के रब! तकलीफ़ दूर कर दे और शिफ़ा दे। तू ही शिफ़ा देने वाला है। तेरी शिफ़ा के अलावा कोई शिफ़ा नहीं; ऐसी शिफ़ा दे जो बीमारी को बाकी न छोड़े।


Reference: Sahih Muslim 2191c/2191d.


FAQ

क्या बीमार की अयादत के समय दुआ पढ़ना सुन्नत है

जी हाँ। सहीह हदीसों में नबी ﷺ से बीमार व्यक्ति के लिए दुआ करना साबित है।

बीमार की अयादत की दुआ कितनी बार पढ़ें?

Sunan Abi Dawud 3106 में पहली दुआ को 7 बार कहने का उल्लेख है।

क्या यह दुआ घर पर बीमार व्यक्ति के लिए भी पढ़ सकते हैं?

बीमार व्यक्ति के लिए शिफ़ा की दुआ करना जायज़ है। अयादत वाली हदीस में बीमार के पास जाकर दुआ करने का उल्लेख है।

क्या यह दुआ कुरआन में है?

नहीं। यह विशेष दुआ हदीस में वर्णित है, कुरआन की आयत नहीं।

क्या शिफ़ा केवल अल्लाह देता है?

इस्लामी विश्वास के अनुसार वास्तविक शिफ़ा अल्लाह ही देता है। सहीह मुस्लिम की हदीस में भी नबी ﷺ ने अल्लाह को शिफ़ा देने वाला बताया है।


निष्कर्ष

बीमार व्यक्ति की अयादत करते समय उसके लिए शिफ़ा की दुआ करना एक नेक अमल है। नबी ﷺ से बीमार के लिए अलग-अलग दुआएँ प्रमाणित हैं।

أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفِيَكَ

इस दुआ को हदीस में 7 बार पढ़ने का उल्लेख मिलता है। अल्लाह सभी बीमारों को जल्द और मुकम्मल शिफ़ा अता फरमाए। आमीन।


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