शाम के अज़कार: अरबी दुआ, हिंदी उच्चारण और फ़ज़ीलत | Rahmat Ki Dua

 

शाम के अज़कार की अरबी दुआ, हिंदी उच्चारण और अर्थ

इस्लाम में अल्लाह का ज़िक्र करना और उससे दुआ माँगना एक महत्वपूर्ण इबादत है। शाम के अज़कार वे ज़िक्र और दुआएँ हैं जिन्हें मुसलमान दिन के अंत में पढ़ते हैं।

शाम के अज़कार में अल्लाह की प्रशंसा, उसकी नेमतों का शुक्र और उससे भलाई तथा सुरक्षा की दुआ शामिल है। इन अज़कार को नियमित रूप से पढ़ने से इंसान को अल्लाह की याद में रहने और अपनी इबादत की आदत बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

इस लेख में शाम के अज़कार की एक प्रमाणित दुआ, उसका अरबी पाठ, हिंदी उच्चारण, अर्थ और प्रामाणिक हदीस का संदर्भ दिया गया है।


शाम के अज़कार की अरबी दुआ

दुआ:
أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ.
اللَّهُمَّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذِهِ اللَّيْلَةِ وَخَيْرَ مَا بَعْدَهَا، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ هَذِهِ اللَّيْلَةِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهَا، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَسُوءِ الْكِبَرِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابٍ فِي النَّارِ وَعَذَابٍ فِي الْقَبْرِ.


हिंदी उच्चारण

अम्सैना व अम्सल-मुल्कु लिल्लाह, वल-हम्दु लिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीक लहू, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।

अल्लाहुम्मा अस्अलुका ख़ैरा हाज़िहिल-लैलति व ख़ैरा मा बअ्दहा, व अऊज़ु बिका मिन शर्रि हाज़िहिल-लैलति व शर्रि मा बअ्दहा। अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल-कसलि व सूइल-किबर। अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन अज़ाबिन फ़िन-नारि व अज़ाबिन फ़िल-क़ब्र।

नोट: हिंदी लिपि में अरबी के सभी उच्चारण पूरी तरह व्यक्त नहीं किए जा सकते। सही उच्चारण के लिए अरबी पाठ और विश्वसनीय क़ुरआन या हदीस पाठ का सहारा लें।


हिंदी अर्थ

हमने शाम की और सारी बादशाहत अल्लाह ही की है। सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए प्रशंसा है। वह हर चीज़ पर सामर्थ्य रखता है।

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस रात की भलाई और इसके बाद आने वाली भलाई माँगता हूँ। मैं इस रात की बुराई और इसके बाद आने वाली बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ।

ऐ अल्लाह! मैं आलस्य और बुढ़ापे की बुरी अवस्था से तेरी पनाह माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मैं आग के अज़ाब और क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह माँगता हूँ।


शाम के अज़कार कब पढ़ें?

शाम के अज़कार शाम के समय पढ़े जाते हैं। इन्हें पढ़ने का उद्देश्य अल्लाह को याद करना, उसका शुक्र अदा करना और उससे भलाई माँगना है।

• शाम के समय अपने नियमित ज़िक्र और दुआ के लिए समय निकालें।

• कोशिश करें कि रोज़ाना नियमित रूप से अज़कार पढ़ें।

• अरबी पाठ को सही पढ़ने का प्रयास करें और उसका अर्थ भी समझें।

• यदि कोई दुआ याद नहीं है, तो उसे देखकर पढ़ सकते हैं।

शाम के अज़कार के लिए अलग-अलग पुस्तकों में समय की व्याख्या में कुछ अंतर मिल सकता है। इसलिए किसी एक निश्चित समय को सभी अज़कार के लिए अनिवार्य बताने से बचना चाहिए।


कुरआन और हदीस का संदर्भ

हदीस का संदर्भ:

• संग्रह: सहीह मुस्लिम

• हदीस नंबर: 2723a

• रावी: अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु)

इस रिवायत में बताया गया है कि अल्लाह के रसूल ﷺ शाम के समय अल्लाह की बादशाहत और प्रशंसा का ज़िक्र करते तथा रात की भलाई माँगते और उसकी बुराई से पनाह माँगते थे।

इस दुआ से संबंधित रिवायत सुनन अबू दाऊद, हदीस 5071 में भी मिलती है। इस नंबरिंग और दर्जे के लिए संबंधित संग्रह का मूल पाठ देखें।

स्रोत:

Sahih Muslim 2723a – Sunnah.com

Sunan Abi Dawud 5071 – Sunnah.com


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल 1: शाम के अज़कार क्या हैं?

शाम के अज़कार वे ज़िक्र और दुआएँ हैं जिन्हें मुसलमान शाम के समय अल्लाह की याद, प्रशंसा और उससे भलाई माँगने के लिए पढ़ते हैं।

सवाल 2: क्या शाम के अज़कार हिंदी में पढ़ सकते हैं?

हिंदी उच्चारण सीखने और समझने में मदद कर सकता है। जहाँ संभव हो, अरबी पाठ सही तरीके से पढ़ना सीखें। दुआ का अर्थ समझना भी उपयोगी है।

सवाल 3: शाम के अज़कार में कौन-सी दुआ पढ़ें?

आप सहीह मुस्लिम 2723a में वर्णित शाम की दुआ से शुरुआत कर सकते हैं। अन्य अज़कार पढ़ते समय उनके अरबी पाठ और हदीस के संदर्भ की जाँच करें।

सवाल 4: क्या शाम के अज़कार रोज़ पढ़ने चाहिए?

रोज़ाना अल्लाह का ज़िक्र करना अच्छी इबादत है। नियमितता बनाए रखने के लिए कुछ प्रमाणित अज़कार से शुरुआत की जा सकती है।

सवाल 5: शाम के अज़कार का क्या उद्देश्य है?

इनका उद्देश्य अल्लाह को याद करना, उसकी प्रशंसा करना, भलाई माँगना और बुराई से उसकी पनाह माँगना है।


निष्कर्ष

शाम के अज़कार मुसलमान को अल्लाह की याद और दुआ के साथ दिन समाप्त करने का अवसर देते हैं। इन दुआओं को केवल पढ़ना ही नहीं, बल्कि उनका अर्थ समझना और नियमित रूप से अमल करना भी महत्वपूर्ण है।

Rahmat Ki Dua का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय इस्लामी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। इसलिए दुआ और हदीस पढ़ते समय प्रामाणिक स्रोतों से संदर्भ की पुष्टि अवश्य करें।

अल्लाह हमें अपने ज़िक्र और दुआ की पाबंदी करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

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