इस्तिग़फ़ार की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और सहीह हदीस Reference | Rahmat Ki Dua

इस्तिग़फ़ार की दुआ अरबी और हिंदी उच्चारण – Rahmat Ki Dua

 इस्तिग़फ़ार का अर्थ है अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की माफी माँगना। एक मुसलमान के लिए अल्लाह से माफी माँगना महत्वपूर्ण इबादत है।

रसूलुल्लाह ﷺ ने इस्तिग़फ़ार के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दुआ सिखाई, जिसे सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार (Sayyid al-Istighfar) कहा जाता है। सहीह अल-बुखारी में इसे इस्तिग़फ़ार की बेहतरीन दुआ बताया गया है।


अरबी दुआ

اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي، لَا إِلٰهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَىٰ عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ لَكَ بِذَنْبِي، فَاغْفِرْ لِي، فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ


हिंदी उच्चारण

अल्लाहुम्मा अंता रब्बी, ला इलाहा इल्ला अंता, ख़लक़्तनी व अना अब्दुका, व अना अला अहदिका व वअदिका मस्ततअतु, अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा सनअतु, अबूउ लका बिनिअमतिका अलय्या, व अबूउ लका बिज़म्बी, फ़ग़फ़िर ली, फ़इन्नहू ला यग़फ़िरुज़्ज़ुनूबा इल्ला अंता।

नोट: हिंदी उच्चारण केवल अरबी पढ़ने में सहायता के लिए है। सही अरबी उच्चारण के लिए अरबी पाठ को देखकर किसी योग्य शिक्षक से सीखना बेहतर है।


हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! आप मेरे रब हैं। आपके सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं। आपने मुझे पैदा किया और मैं आपका बंदा हूँ।

मैं अपनी क्षमता के अनुसार आपके अहद और वादे पर कायम हूँ। मैंने जो कुछ किया है, उसके बुरे परिणाम से मैं आपकी पनाह माँगता हूँ।

मैं अपने ऊपर आपकी नेमतों को स्वीकार करता हूँ और अपने गुनाह का भी इक़रार करता हूँ। इसलिए मुझे माफ कर दीजिए, क्योंकि आपके सिवा कोई गुनाहों को माफ करने वाला नहीं।


दुआ कब पढ़ें?

सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार को दिन या रात में पढ़ा जा सकता है।

सहीह अल-बुखारी की हदीस में इसके लिए विशेष रूप से दिन और रात का उल्लेख आया है। इसलिए इसे सुबह दिन के समय और रात के समय पढ़ना एक अच्छी आदत हो सकती है।

इस्तिग़फ़ार केवल किसी एक समय तक सीमित नहीं है। जब इंसान अपने गुनाहों पर पछताए और अल्लाह से माफी माँगना चाहे, तो वह इस्तिग़फ़ार कर सकता है


कुरआन/हदीस Reference

 कुरआन Reference

कुरआन में नबी नूह़ عليه السلام की अपनी क़ौम से कही बात का उल्लेख है:

सूरह नूह़, 71:10

इस आयत में अल्लाह से माफी माँगने की ओर बुलाया गया है और बताया गया है कि वह बहुत माफ करने वाला है।

 हदीस Reference

सहीह अल-बुखारी, हदीस नंबर 6306

शद्दाद बिन औस رضي الله عنه से रिवायत है कि नबी ﷺ ने सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार सिखाया और इसे इस्तिग़फ़ार करने का सबसे बेहतर तरीका बताया। हदीस में दिन और रात में इसे यक़ीन के साथ पढ़ने की बड़ी फ़ज़ीलत भी बयान हुई है।

Reference: Sahih al-Bukhari 6306, Book of Invocations.


FAQ

इस्तिग़फ़ार क्या है?

इस्तिग़फ़ार का मतलब अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की माफी माँगना है।

सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार क्या है?

सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार वह दुआ है जिसे नबी ﷺ ने इस्तिग़फ़ार की बेहतरीन दुआ बताया है। इसका उल्लेख सहीह अल-बुखारी 6306 में मिलता है।

क्या इस्तिग़फ़ार दिन में पढ़ सकते हैं?

जी हाँ। इस्तिग़फ़ार दिन और रात दोनों समय किया जा सकता है। सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार के बारे में सहीह अल-बुखारी में दिन और रात दोनों का उल्लेख है।

क्या इस्तिग़फ़ार के लिए केवल यही दुआ पढ़नी चाहिए?

नहीं। अल्लाह से माफी माँगने के लिए इस्तिग़फ़ार के अलग-अलग सहीह तरीके मिलते हैं। सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार उनमें से एक महत्वपूर्ण दुआ है।

क्या इस्तिग़फ़ार केवल गुनाह करने के बाद करना चाहिए?

इस्तिग़फ़ार किसी एक परिस्थिति तक सीमित नहीं है। मुसलमान नियमित रूप से अल्लाह से माफी माँग सकता है।


 निष्कर्ष

इस्तिग़फ़ार एक मुसलमान को अपने रब की ओर लौटने और अपने गुनाहों की माफी माँगने की याद दिलाता है।

सैय्यिदुल इस्तिग़फ़ार नबी ﷺ से साबित एक महत्वपूर्ण दुआ है। इसे समझकर, दिल से और अल्लाह पर यक़ीन के साथ पढ़ना चाहिए।

अल्लाह तआला हमें अपने गुनाहों से सच्ची तौबा करने और लगातार इस्तिग़फ़ार करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।


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