इस्तिखारा की दुआ: अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और पढ़ने का तरीका | Rahmat Ki Dua

 

इस्तिखारा की दुआ अरबी, हिंदी उच्चारण और अर्थ | Rahmat Ki Dua

जब किसी जायज़ काम के बारे में निर्णय लेने में व्यक्ति असमंजस में हो, तो वह अल्लाह से भलाई और सही मार्गदर्शन मांगने के लिए इस्तिखारा कर सकता है।

इस्तिखारा में बंदा अल्लाह से यह दुआ करता है कि अगर कोई काम उसके दीन, दुनिया और भविष्य के लिए अच्छा है तो अल्लाह उसे आसान कर दे और उसमें बरकत दे। और अगर वह काम उसके लिए नुकसानदेह है तो अल्लाह उसे उससे दूर कर दे और उसके लिए बेहतर चीज़ निर्धारित करे।

हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह رضي الله عنه से वर्णित है कि नबी ﷺ सहाबा को इस्तिखारा उसी तरह सिखाते थे जैसे कुरआन की सूरह सिखाते थे।


अरबी दुआ

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ، وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ۔


اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي، فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي، ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي، فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ، وَاقْدُرْ لِيَ الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ، ثُمَّ أَرْضِنِي بِهِ۔

दुआ में “هَذَا الْأَمْرَ” (यह काम) कहने के स्थान पर व्यक्ति अपनी जरूरत या जिस मामले के लिए इस्तिखारा कर रहा है, उसे याद करता है। यह बात हदीस में स्पष्ट रूप से आई है।


हिंदी उच्चारण

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्तख़ीरुका बि-इल्मिक, व अस्तक़दिरुका बि-क़ुदरतिका, व असअलुका मिन फ़ज़्लिकल-अज़ीम, फ़-इन्नका तक़दिरु वला अक़दिरु, व तअलमु वला आलमु, व अन्त अल्लामुल-ग़ुयूब।

अल्लाहुम्मा इन कुन्ता तअलमु अन्ना हाज़ल-अम्र ख़ैरुल्ली फ़ी दीनि व मआशी व आक़िबति अम्री, फ़क़्दुरहु ली व यस्सिरहु ली, सुम्मा बारिक ली फ़ीहि।


व इन कुन्ता तअलमु अन्ना हाज़ल-अम्र शर्रुल्ली फ़ी दीनि व मआशी व आक़िबति अम्री, फ़स्रिफ़हु अन्नी वस्रिफ़नी अन्हु, वक़्दुर लियल-ख़ैरा हैसु काना, सुम्मा अरज़िनी बिही।

नोट: हिंदी उच्चारण केवल मदद के लिए है। अरबी दुआ को सही अरबी उच्चारण के साथ पढ़ना बेहतर है।


हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मैं तेरे ज्ञान के माध्यम से तुझसे भलाई मांगता हूँ और तेरी शक्ति के माध्यम से शक्ति मांगता हूँ। मैं तेरे महान فضل का सवाल करता हूँ। निश्चय ही तू सक्षम है और मैं सक्षम नहीं हूँ, तू जानता है और मैं नहीं जानता, और तू सभी छिपी हुई चीज़ों को जानने वाला है।

ऐ अल्लाह! अगर तू जानता है कि यह काम मेरे दीन, मेरी आजीविका और मेरे काम के अंजाम के लिए बेहतर है, तो इसे मेरे लिए निर्धारित कर दे, इसे मेरे लिए आसान कर दे और इसमें मेरे लिए बरकत दे।

और अगर तू जानता है कि यह काम मेरे दीन, मेरी आजीविका और मेरे काम के अंजाम के लिए बुरा है, तो इसे मुझसे दूर कर दे और मुझे इससे दूर कर दे। और मेरे लिए जहाँ भी भलाई हो, उसे निर्धारित कर दे और फिर मुझे उससे संतुष्ट कर दे।


इस्तिखारा की दुआ कब पढ़ें?

हदीस के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी काम का इरादा करे तो वह फ़र्ज़ नमाज़ के अलावा दो रकअत नमाज़ पढ़े और उसके बाद इस्तिखारा की दुआ करे।

इस्तिखारा किसी जायज़ मामले में अल्लाह से भलाई और मार्गदर्शन मांगने का तरीका है।

दुआ में अपने उस काम या मामले को याद किया जाता है जिसके लिए इस्तिखारा किया जा रहा है।

क्या इस्तिखारा के बाद सपना आना जरूरी है?

नहीं। हदीस में इस्तिखारा के परिणाम के लिए सपना देखने को शर्त नहीं बताया गया है। इसलिए केवल सपना आने या न आने को इस्तिखारा का निश्चित परिणाम मानना उचित नहीं है।


कुरआन/हदीस Reference

इस्तिखारा की यह दुआ हदीस में वर्णित है।

हदीस:
हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह رضي الله عنه से वर्णित है कि नबी ﷺ सहाबा को इस्तिखारा सिखाते थे और दो रकअत नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ने की शिक्षा देते थे।

Reference:

Sahih al-Bukhari 1166, Book 19, Hadith 45

Sahih al-Bukhari 6382, Book 80, Hadith 77

कुरआन में इस्तिखारा की यह विशेष दुआ इसी शब्दों में वर्णित नहीं है। इसलिए इसे कुरआन की आयत बताना सही नहीं होगा।


FAQ

इस्तिखारा क्या है?

इस्तिखारा का अर्थ है किसी मामले में अल्लाह से भलाई और सही निर्णय की मांग करना।

इस्तिखारा की नमाज़ कितनी रकअत है?

हदीस में फ़र्ज़ के अलावा दो रकअत पढ़ने का उल्लेख है।

क्या इस्तिखारा के बाद सपना देखना जरूरी है?

नहीं। इस्तिखारा के लिए सपना देखना हदीस में अनिवार्य नहीं बताया गया है।

क्या हर मामले में इस्तिखारा किया जा सकता है?

हदीस में इस्तिखारा को मामलों के संबंध में सिखाया गया है। इस्तिखारा विशेष रूप से ऐसे जायज़ मामलों में उपयोगी है जहाँ व्यक्ति निर्णय को लेकर असमंजस में हो।

इस्तिखारा में किस चीज़ के लिए दुआ करें?

जिस जायज़ काम के बारे में निर्णय लेना हो, उसे ध्यान में रखकर अल्लाह से भलाई मांगें।


निष्कर्ष

इस्तिखारा अल्लाह पर भरोसा करते हुए उससे अपने लिए बेहतर निर्णय और भलाई मांगने का तरीका है। नबी ﷺ ने सहाबा को इसे सिखाया और इसके लिए दो रकअत नमाज़ तथा विशेष दुआ बताई।

इसलिए किसी जायज़ और महत्वपूर्ण मामले में निर्णय लेते समय अल्लाह से मार्गदर्शन मांगना और फिर उचित सलाह व समझदारी के साथ निर्णय लेना बेहतर है।

अल्लाह हमें अपने लिए सही और बेहतर रास्ता चुनने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।






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