मस्जिद से निकलते समय अल्लाह को याद करना और दुआ पढ़ना सुन्नत है। नबी ﷺ ने मस्जिद से बाहर निकलते समय अल्लाह से उसके फ़ज़्ल यानी कृपा और इनायत मांगने की दुआ सिखाई है।
यह दुआ छोटी और आसान है, इसलिए इसे मस्जिद से निकलते समय याद करके पढ़ना आसान है।
अरबी दुआ
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
हिंदी उच्चारण
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका मिन फ़ज़्लिक।
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल (कृपा और इनायत) का सवाल करता हूँ।
दुआ कब पढ़ें
मस्जिद से बाहर निकलते समय यह दुआ पढ़ी जाती है।
हदीस में मस्जिद में प्रवेश करते समय अल्लाह की रहमत मांगने और बाहर निकलते समय अल्लाह के फ़ज़्ल का सवाल करने का उल्लेख मिलता है।
कुरआन/हदीस Reference
इस दुआ का उल्लेख Sunan Abi Dawud, Hadith 465 (Book 2, Hadith 75) में मिलता है।
हदीस में अबू हुमैद या अबू उसैद अल-अंसारी رضي الله عنه से वर्णित है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने मस्जिद से निकलते समय कहा:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
अर्थ: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल का सवाल करता हूँ।
इस हदीस को अल्बानी ने सहीह दर्जा दिया है।
नोट: कुछ दुआ की किताबों में इसके साथ अन्य शब्द भी मिलते हैं। लेकिन इस लेख में मुख्य दुआ वही रखी गई है जो Sunan Abi Dawud 465 में स्पष्ट रूप से मस्जिद से निकलने के संबंध में वर्णित है।
FAQ
मस्जिद से निकलने की दुआ क्या है?
मस्जिद से निकलते समय पढ़ी जाने वाली दुआ है:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
अर्थ: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल का सवाल करता हूँ।
मस्जिद से निकलते समय कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?
मस्जिद से निकलते समय ऊपर दी गई दुआ पढ़ना हदीस से प्रमाणित है।
क्या यह दुआ हदीस में है?
हाँ। यह दुआ Sunan Abi Dawud 465 में वर्णित है और स्रोत पर इसे अल्बानी द्वारा सहीह दर्ज किया गया है।
क्या मस्जिद से निकलने की दुआ और मस्जिद में प्रवेश की दुआ अलग है?
हाँ। हदीस में मस्जिद में प्रवेश करते समय अल्लाह की रहमत मांगने और बाहर निकलते समय उसके फ़ज़्ल का सवाल करने का उल्लेख है।
निष्कर्ष
मस्जिद से निकलते समय यह छोटी-सी दुआ पढ़ना नबी ﷺ से वर्णित सुन्नत है। इसे याद करके हर बार मस्जिद से बाहर निकलते समय पढ़ने की कोशिश करें।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
अल्लाह हमें अपने फ़ज़्ल और रहमत से नवाज़े। आमीन।
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