सफर की दुआ – अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ और हदीस Reference | Rahmat Ki Dua

सफर की दुआ अरबी हिंदी उच्चारण और अर्थ

 इस्लाम में सफर के दौरान अल्लाह को याद करना और उससे आसानी, सुरक्षा तथा भलाई की दुआ करना सिखाया गया है। नबी ﷺ जब सवारी पर बैठते तो अल्लाह की नेमत को याद करते और सफर की दुआ पढ़ते थे।

सफर की यह दुआ पढ़कर मुसलमान अल्लाह का शुक्र अदा करता है और अपने सफर को उसके हवाले करता है।


अरबी दुआ

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى، وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى، اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا، وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، اللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ، وَالْخَلِيفَةُ فِي الْأَهْلِ

सवारी पर बैठने के समय कुरआन की ये आयतें भी पढ़ी जाती हैं:

سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ ۝ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ

यह आयतें सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़ 43:13–14 में हैं।


हिंदी उच्चारण

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका फी सफरिना हाज़ल-बिर्रा वत्तक़्वा, व मिनल-अमलि मा तरज़ा। अल्लाहुम्मा हव्विन अलैना सफरना हाज़ा, वत्वि अन्ना बुअ्दहू। अल्लाहुम्मा अन्तस-साहिबु फिस-सफरि, वल-ख़लीफ़तु फिल-अहल।

कुरआनी आयतों का उच्चारण:

सुब्हानल्लज़ी सख़्ख़रा लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़रिनीन। व इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून।

अरबी उच्चारण में सही मख़ारिज़ और तजवीद के लिए किसी योग्य क़ारी से सीखना बेहतर है।


हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! हम इस सफर में तुझसे नेकी, तक़वा और ऐसे काम की तौफ़ीक़ माँगते हैं जिससे तू राज़ी हो जाए। ऐ अल्लाह! हमारे इस सफर को हमारे लिए आसान कर दे और इसकी दूरी को हमारे लिए समेट दे। ऐ अल्लाह! तू ही सफर में हमारा साथी और हमारे घरवालों का निगहबान है।

कुरआन की आयतों का अर्थ है:

पाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे अधीन कर दिया, जबकि हम इसे अपने वश में करने वाले नहीं थे। और निश्चय ही हम अपने रब की ओर लौटकर जाने वाले हैं।

(सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़ 43:13–14)


दुआ कब पढ़ें

सफर पर निकलते समय, विशेषकर सवारी पर बैठने के बाद, यह दुआ पढ़ना मस्नून है।

चाहे यात्रा कार, बस, ट्रेन, हवाई जहाज या किसी अन्य साधन से हो, व्यक्ति अल्लाह को याद कर सकता है और उससे अपने सफर में आसानी व भलाई की दुआ कर सकता है।

सफर के दौरान ऊँचाई पर चढ़ते समय तकबीर और नीचे उतरते समय तस्बीह कहने का भी नबी ﷺ से प्रमाण मिलता है। सहीह अल-बुखारी 2992–2994 में इसका उल्लेख है।


कुरआन/हदीस Reference

 कुरआन Reference

सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़ — 43:13–14

इन आयतों में सवारी पर बैठने के बाद अल्लाह की नेमत को याद करने और उसकी महानता बयान करने का उल्लेख है।

 हदीस Reference

सफर की विस्तृत दुआ अब्दुल्लाह बिन उमर رضي الله عنهما से वर्णित है और सहीह मुस्लिम 1342 में दर्ज है। इसमें नबी ﷺ के सफर के दौरान नेकी, तक़वा, आसानी और घरवालों की हिफाज़त के लिए दुआ करने का वर्णन मिलता है।

सफर में ऊँचाई पर पहुँचने पर तकबीर कहने के बारे में सहीह अल-बुखारी 2992 में भी हदीस मौजूद है।


FAQ

सफर की दुआ कब पढ़नी चाहिए?

सफर शुरू करते समय, सवारी पर बैठने के बाद सफर की दुआ पढ़ी जा सकती है।

क्या कार में सफर की दुआ पढ़ सकते हैं?

हाँ। यह दुआ किसी विशेष वाहन तक सीमित नहीं है। कार, बस, ट्रेन या अन्य सवारी में सफर करते समय इसे पढ़ा जा सकता है।

क्या सफर की दुआ कुरआन में है?

सवारी पर बैठने के समय पढ़ी जाने वाली “सुब्हानल्लज़ी सख़्ख़रा लना हाज़ा…” आयतें सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़ 43:13–14 में हैं।

सफर की दुआ किस हदीस में है?

सफर की दुआ का वर्णन सहीह मुस्लिम 1342 में मिलता है।

क्या सफर से वापस आते समय भी कोई दुआ है?

हाँ। नबी ﷺ सफर से लौटते समय अल्लाह की ओर लौटने, तौबा, इबादत और अपने रब की प्रशंसा के शब्द कहते थे। इसका वर्णन सहीह हदीसों में मिलता है।


निष्कर्ष

सफर मुसलमान के लिए अल्लाह की कुदरत और उसकी नेमतों को याद करने का अवसर है। सफर की दुआ पढ़कर हम अल्लाह से नेकी, तक़वा, सफर में आसानी और अपने घरवालों की हिफाज़त की दुआ करते हैं।

इसलिए सफर शुरू करते समय मस्नून दुआ को याद करना और अल्लाह का ज़िक्र करना एक अच्छी सुन्नत है।

अल्लाह हमारे हर सफर को सुरक्षित, आसान और बरकत वाला बनाए। आमीन।




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