इस्तिखारा की दुआ (सलातुल इस्तिखारा) – अरबी, हिंदी अर्थ, पढ़ने का सही तरीका और फ़ज़ीलत

 
इस्तिखारा की दुआ अरबी में, हिंदी अर्थ और दो रकअत नमाज़ के साथ इस्तिखारा करने का तरीका

जब इंसान किसी महत्वपूर्ण फैसले जैसे निकाह, नौकरी, कारोबार, सफर या किसी बड़े काम के बारे में उलझन में हो, तो इस्लाम हमें सलातुल इस्तिखारा सिखाता है। इस्तिखारा का मतलब है अल्लाह तआला से भलाई और सही रास्ते की दुआ करना। यह दुआ हमें अल्लाह की रहनुमाई पर भरोसा करना सिखाती है।

Arabic Text

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ، وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ، اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ (यहाँ अपना काम बताएँ) خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّهُ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ، وَاقْدُرْ لِيَ الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي بِهِ.

हिंदी उच्चारण

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्तख़ीरुका बि इल्मिक, व अस्तक़्दिरुका बि क़ुद्रतिक, व असअलुका मिन फ़ज़्लिकल अज़ीम। फ़इन्नका तक़्दिरु वला अक़्दिर, व तअलमु वला अअलम, व अंता अल्लामुल ग़ुयूब। अल्लाहुम्मा इन् कुन्ता तअलमु अन्ना हाज़ल अम्र (अपना काम बताएँ) ख़ैरुल्ली फ़ी दीनी व मआशी व आक़िबति अम्री फ़ाक़्दुरहु ली व यस्सिरहु ली सुम्मा बारिक ली फ़ीह। व इन् कुन्ता तअलमु अन्नहु शर्रुल्ली फ़ी दीनी व मआशी व आक़िबति अम्री फ़ास्रिफ्हु अन्नी वस्रिफ्नी अन्हु, वक़्दुर लियाल ख़ैरा हैसु काना सुम्मा अरदिनी बिही।

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के ज़रिए तुझसे भलाई चाहता हूँ, तेरी कुदरत के ज़रिए तुझसे ताक़त चाहता हूँ और तेरे महान फ़ज़्ल का सवाल करता हूँ। बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है और मैं नहीं, तू जानता है और मैं नहीं जानता, और तू हर ग़ैब की बात जानने वाला है। अगर यह काम मेरे दीन, दुनिया और मेरे अंजाम के लिए बेहतर है, तो इसे मेरे लिए मुक़द्दर कर दे, आसान कर दे और इसमें बरकत दे। और अगर यह काम मेरे लिए बुरा है, तो इसे मुझसे और मुझे इससे दूर कर दे तथा जहाँ भी भलाई हो, वही मेरे लिए मुक़द्दर कर दे और मुझे उस पर राज़ी कर दे।

हदीस संदर्भ

हज़रत जाबिर (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ हमें हर महत्वपूर्ण काम में इस्तिखारा करना उसी तरह सिखाते थे जैसे कुरआन की कोई सूरह सिखाते थे।

संदर्भ: सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 1166

फ़ज़ीलत

हर महत्वपूर्ण फैसले में अल्लाह की रहनुमाई मिलती है।
दिल को सुकून और इत्मीनान मिलता है।
गलत फैसलों से बचने का ज़रिया बनता है।
अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) मजबूत होता है।
इंसान अपने फैसले को अल्लाह के हवाले कर देता है।

कब और कैसे पढ़ें

वुज़ू करें।
दो रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़ें।
सलाम फेरने के बाद इस्तिखारा की दुआ पढ़ें।
दुआ में अपने काम का नाम लें।
अल्लाह पर भरोसा रखें और जो आसान हो, उसमें भलाई समझें।
ध्यान दें: इस्तिखारा का मतलब केवल सपना देखना नहीं है। सही फैसला, दिल का इत्मीनान और हालात का आसान होना भी इस्तिखारा के नतीजों में शामिल हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या इस्तिखारा सिर्फ निकाह के लिए है?
नहीं, यह हर महत्वपूर्ण और जायज़ काम के लिए किया जा सकता है।
2. क्या इस्तिखारा के बाद सपना आना ज़रूरी है?
नहीं, सपना आना ज़रूरी नहीं है।
3. कितनी बार इस्तिखारा कर सकते हैं?
ज़रूरत हो तो कई दिनों तक भी कर सकते हैं।
4. क्या बिना नमाज़ के सिर्फ दुआ पढ़ सकते हैं?
अगर किसी वजह से नमाज़ न पढ़ सकें, तो दुआ करना बेहतर है; लेकिन सुन्नत तरीका दो रकअत नमाज़ के बाद दुआ पढ़ना है।
5. क्या हर फैसला इस्तिखारा से करना चाहिए?
महत्वपूर्ण और जायज़ मामलों में इस्तिखारा करना सुन्नत है।

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निष्कर्ष

इस्तिखारा एक ऐसी सुन्नत है जो मुसलमान को हर महत्वपूर्ण फैसले में अल्लाह की रहनुमाई लेने की शिक्षा देती है। जब भी किसी काम में उलझन हो, दो रकअत नमाज़ पढ़कर पूरे भरोसे के साथ यह दुआ करें और अल्लाह के फैसले पर राज़ी रहें।

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