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बारिश की दुआ (Barish Ki Dua) – अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ, हदीस, फ़ज़ीलत और पढ़ने का सही तरीका

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 बारिश अल्लाह तआला की बहुत बड़ी नेमत है। इस्लाम में बारिश के समय दुआ करना मुस्तहब (पसंदीदा अमल) है क्योंकि यह दुआ की क़ुबूलियत के खास मौकों में से एक माना गया है। नबी ﷺ बारिश होने पर अल्लाह से रहमत और बरकत की दुआ करते थे। आइए बारिश की मस्नून दुआ, उसका अर्थ, फ़ज़ीलत और पढ़ने का तरीका जानते हैं। Arabic Text اللَّهُمَّ صَيِّبًا نَافِعًا हिंदी उच्चारण अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफिअन हिंदी अर्थ ऐ अल्लाह! इस बारिश को लाभदायक, रहमत वाली और फ़ायदे की बारिश बना। हदीस संदर्भ यह दुआ सहीह अल-बुख़ारी (हदीस: 1032) में वर्णित है। जब बारिश होती थी तो नबी ﷺ यह दुआ पढ़ते थे: اللَّهُمَّ صَيِّبًا نَافِعًا फ़ज़ीलत बारिश अल्लाह की रहमत और नेमत है। बारिश के समय दुआ करना क़ुबूलियत के मौकों में से है। इस दुआ से अल्लाह से लाभदायक और रहमत वाली बारिश की दुआ की जाती है। नबी ﷺ की सुन्नत पर अमल करने का सवाब मिलता है। कब और कैसे पढ़ें जब बारिश शुरू हो। आसमान से बारिश गिरते समय। हाथ उठाकर अल्लाह से अपनी ज़रूरतों की भी दुआ करें। बारिश को रहमत समझें और अल्लाह का शुक्र अदा करें। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 1. बारिश ...