सोने से पहले की मस्नून दुआ | अरबी, हिंदी अर्थ, फ़ज़ीलत और हदीस
सोने से पहले की मस्नून दुआ | अरबी, हिंदी अर्थ, हिंदी उच्चारण, हदीस, फ़ज़ीलत और पढ़ने का तरीका
हर मुसलमान को अपने दिन की शुरुआत और अंत अल्लाह के ज़िक्र के साथ करना चाहिए। सोने से पहले पढ़ी जाने वाली यह मस्नून दुआ नबी ﷺ की सुन्नत है। यह दुआ अल्लाह पर भरोसा, उसकी हिफाज़त की उम्मीद और उसके ज़िक्र के साथ सोने की शिक्षा देती है। इस लेख में आप सोने से पहले की मस्नून दुआ का अरबी पाठ, हिंदी उच्चारण, हिंदी अर्थ, हदीस का संदर्भ, फ़ज़ीलत और इसे कब व कैसे पढ़ना चाहिए, इसकी पूरी जानकारी जानेंगे।
अगर आप रोज़ाना इस मस्नून दुआ को पढ़ेंगे तो इंशाअल्लाह सुन्नत पर अमल होगा और अल्लाह तआला की रहमत, बरकत और हिफाज़त की उम्मीद रहेगी। इसलिए हर मुसलमान को सोने से पहले इस दुआ को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए।
अरबी
اللّٰهُمَّ بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا
हिंदी उच्चारण
अल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु वा अह्या।
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! मैं तेरे ही नाम के साथ सोता हूँ और तेरे ही नाम के साथ जागता हूँ।
हदीस / क़ुरआन का संदर्भ
यह दुआ हज़रत हुज़ैफ़ा (रज़ि.) और हज़रत अबू ज़र (रज़ि.) से रिवायत है कि जब नबी ﷺ सोने के लिए बिस्तर पर जाते तो यह दुआ पढ़ते:
"اللّٰهُمَّ بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا"
संदर्भ:
सहीह अल-बुख़ारी: 6324
सहीह अल-बुख़ारी: 7394
फ़ज़ीलत
सोने से पहले अल्लाह का ज़िक्र करने का सवाब मिलता है।
रात भर अल्लाह की हिफाज़त की उम्मीद रहती है।
सुन्नत पर अमल करने का पुण्य मिलता है।
दिल को सुकून और इत्मीनान मिलता है।
ईमान मज़बूत होता है और अल्लाह पर भरोसा बढ़ता है।
कैसे पढ़ें / कब पढ़ें
सोने से ठीक पहले बिस्तर पर लेटने के बाद पढ़ें।
बेहतर है कि पहले वुज़ू कर लें।
दाहिनी करवट पर सोना सुन्नत है।
इस दुआ के साथ आयतुल कुर्सी तथा सूरह इख़लास, फ़लक और नास पढ़ना भी सुन्नत है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. सोने से पहले की मस्नून दुआ कौन-सी है?
اللّٰهُمَّ بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا
2. क्या यह दुआ रोज़ पढ़नी चाहिए?
जी हाँ, यह नबी ﷺ की सुन्नत है और हर रात सोने से पहले पढ़नी चाहिए।
3. क्या बिना वुज़ू के यह दुआ पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, दुआ पढ़ सकते हैं। लेकिन वुज़ू करके सोना सुन्नत और बेहतर है।
4. इस दुआ का सबसे बड़ा फ़ायदा क्या है?
अल्लाह की याद के साथ सोना, उसकी हिफाज़त की उम्मीद और सुन्नत पर अमल का सवाब।
5. क्या बच्चे भी यह दुआ सीख सकते हैं?
जी हाँ, बच्चों को छोटी उम्र से यह दुआ याद कराना बहुत अच्छी बात है।
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निष्कर्ष
सोने से पहले की मस्नून दुआ एक छोटी लेकिन बहुत बरकत वाली सुन्नत है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह हर रात सोने से पहले यह दुआ पढ़े और अपने बच्चों को भी सिखाए। अल्लाह तआला हमें नबी ﷺ की सुन्नतों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
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