घर में दाखिल होने की दुआ | अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ, हदीस, फ़ज़ीलत और पढ़ने का सही तरीका

घर में दाखिल होते ही पढ़ें यह दुआ 🤲

शैतान घर में दाखिल नहीं होगा!
इस्लाम हमें जीवन के हर छोटे-बड़े काम के लिए दुआ सिखाता है। घर में दाखिल होते समय अल्लाह का नाम लेना एक सुन्नत है। इससे घर में बरकत आती है, शैतान को घर में रहने और खाने का मौका नहीं मिलता, और अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है।
घर से निकलने की दुआ
✅ अरबी

بِسْمِ اللَّهِ وَلَجْنَا، وَبِسْمِ اللَّهِ خَرَجْنَا، وَعَلَى رَبِّنَا تَوَكَّلْنَا

✅ हिंदी उच्चारण

बिस्मिल्लाहि वलज्ना, व बिस्मिल्लाहि खराज्ना, व अला रब्बिना तवक्कल्ना।

✅ हिंदी अर्थ

अल्लाह के नाम के साथ हम घर में दाखिल हुए, अल्लाह के नाम के साथ हम निकले, और हमने अपने रब अल्लाह पर भरोसा किया।

✅ हदीस का संदर्भ

यह दुआ हज़रत अबू मालिक अल-अशअरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है।
संदर्भ:

सुनन अबू दाऊद – हदीस 5096 (इसे कई विद्वानों ने हसन कहा है।)

✅ फ़ज़ीलत

घर में अल्लाह की बरकत आती है।
शैतान घर में दाखिल नहीं हो पाता।
घर का माहौल रहमत और सुकून वाला बनता है।
हर काम में अल्लाह पर भरोसा करने की आदत बनती है।
घर वालों के लिए भी यह सुन्नत अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

✅ कैसे पढ़ें / कब पढ़ें

घर में प्रवेश करने से पहले या प्रवेश करते ही पढ़ें।
यदि संभव हो तो "अस्सलामु अलैकुम" कहकर घर वालों को सलाम करें।
घर खाली हो तब भी अल्लाह का नाम लेकर यह दुआ पढ़ना अच्छा है।
रोज़ाना इस सुन्नत को अपनाने की कोशिश करें।

✅ अतिरिक्त पैराग्राफ

रसूलुल्लाह ﷺ ने हर अच्छे काम की शुरुआत अल्लाह के नाम से करने की शिक्षा दी है। घर में दाखिल होने की यह दुआ न केवल एक इबादत है बल्कि अपने परिवार और घर को अल्लाह की हिफाज़त में सौंपने का भी माध्यम है। इसलिए बच्चों को भी छोटी उम्र से यह दुआ याद करानी चाहिए ताकि उनके जीवन में सुन्नत की आदत विकसित हो।

✅ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या यह दुआ हर बार घर में प्रवेश करते समय पढ़नी चाहिए?
जी हाँ, हर बार घर में दाखिल होते समय पढ़ना सुन्नत है।

2. अगर दुआ याद न हो तो क्या करें?
कम से कम "बिस्मिल्लाह" कहकर घर में प्रवेश करें और धीरे-धीरे पूरी दुआ याद कर लें।

3. क्या घर खाली हो तब भी दुआ पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, घर खाली हो तब भी यह दुआ पढ़ना बेहतर है।

4. क्या बच्चों को यह दुआ सिखानी चाहिए?
बिल्कुल, यह सुन्नत है और बच्चों को बचपन से सिखाना चाहिए।

✅ संबंधित लेख

घर से निकलने की दुआ
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ
खाने से पहले की दुआ
सोने की दुआ
सुबह और शाम की दुआएँ

✅ निष्कर्ष

घर में दाखिल होने की यह छोटी-सी दुआ हमारे घर को बरकत, रहमत और अल्लाह की हिफाज़त से भर देती है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस सुन्नत को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाए और अपने परिवार को भी इसकी आदत डाले।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

इस्तिखारा की दुआ (सलातुल इस्तिखारा) – अरबी, हिंदी अर्थ, पढ़ने का सही तरीका और फ़ज़ीलत

बीमार की अयादत की दुआ | मरीज से मिलने की दुआ अरबी, हिंदी, अर्थ और फ़ज़ीलत

वुज़ू से पहले और बाद की दुआ | अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ, हदीस और फ़ज़ीलत