सूरह फलाक का अर्थ हिंदी में | Surah Al-Falaq Hindi Translation Tafsir Fazilat

 

सूरह फलाक का अर्थ हिंदी में - अरबी टेक्स्ट, हिंदी उच्चारण और तफ़्सीर

सूरह फलाक का अर्थ – हर बुराई से अल्लाह की पनाह माँगने वाली मुबारक सूरह।

सूरह फलाक का अर्थ जानना हर मुसलमान के लिए लाभदायक है। यह कुरआन की 113वीं सूरह है और इसमें अल्लाह तआला हमें हर प्रकार की बुराई, अंधकार, जादू और हसद (ईर्ष्या) से उसकी पनाह माँगना सिखाते हैं। यह सूरह छोटी होने के बावजूद बहुत महान है और सुबह-शाम की दुआओं में पढ़ी जाती है।

Quick Information

 सूरह नंबर: 113

 पारा: 30

 मक्की / मदनी: मक्की

 आयतें: 5

 रुकू: 1

 मुख्य विषय: हर प्रकार की बुराई से अल्लाह की पनाह माँगना।

अरबी टेक्स्ट

                     بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

                            قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ

                                  مِن شَرِّ مَا خَلَقَ

                     وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ

                 وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ

                     وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ

हिंदी उच्चारण

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
कुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक़।
मिन शर्रि मा ख़लक़।
व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब।
व मिन शर्रिन्नफ़्फ़ासाति फिल उक़द।
व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद।

हिंदी अर्थ

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो अत्यन्त कृपालु, बड़ा दयावान है।

1. कह दो: मैं सुबह के पालनहार की पनाह माँगता हूँ।
2. उसकी पैदा की हुई हर चीज़ की बुराई से।
3. अंधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए।
4. गिरहों में फूँक मारने वालों (जादू करने वालों) की बुराई से।
5..और ईर्ष्या करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करे।

संक्षिप्त तफ़्सीर

सूरह फलाक में अल्लाह तआला अपने बंदों को सिखाते हैं कि हर प्रकार की बुराई से केवल उसी की पनाह माँगी जाए। इसमें प्राकृतिक बुराइयों, अंधकार, जादू तथा हसद जैसी हानिकारक चीज़ों से सुरक्षा की दुआ है। यह सूरह इंसान के ईमान, भरोसे और तवक्कुल को मज़बूत करती है।

हदीस / कुरआन संदर्भ

सूरह अल-फलाक — कुरआन, सूरह 113।

हज़रत आयशा (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी ﷺ हर रात सूरह इख़लास, सूरह फलाक और सूरह नास पढ़कर अपने हाथों पर दम करते और पूरे शरीर पर फेरते थे। (सहीह अल-बुख़ारी)

फ़ज़ीलत

बुरी नज़र और हसद से बचाव की दुआ।
सुबह और शाम की अज़कार में शामिल।
सोने से पहले पढ़ना सुन्नत है।
जादू और शैतानी असर से अल्लाह की पनाह का ज़रिया।

कब और कैसे पढ़ें

सुबह और शाम तीन-तीन बार पढ़ें।
सोने से पहले सूरह इख़लास और सूरह नास के साथ पढ़ें।
किसी डर, परेशानी या बुरी नज़र की आशंका हो तो पढ़कर दुआ करें।

महत्वपूर्ण बातें / सावधानियाँ

सुरक्षा केवल अल्लाह की ओर से मिलती है।
सूरह को समझकर और दिल से पढ़ें।
किसी भी प्रकार के अंधविश्वास से बचें।
दुआ के साथ अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. सूरह फलाक में कितनी आयतें हैं?
Ans: 5 आयतें।
Q2. सूरह फलाक मक्की है या मदनी?
Ans: मक्की सूरह है।
Q3. सूरह फलाक कब पढ़नी चाहिए?
Ans: सुबह, शाम और सोने से पहले पढ़ना सुन्नत है।
Q4. सूरह फलाक किससे सुरक्षा की दुआ है?
Ans: हर प्रकार की बुराई, जादू, अंधकार और हसद से।
Q5. क्या सूरह फलाक रोज़ पढ़ सकते हैं?
Ans: जी हाँ, इसे रोज़ पढ़ना मुस्तहब और फ़ायदेमंद है।

संबंधित लेख (Related Articles)

 सूरह इख़लास का अर्थ
 सूरह नास का अर्थ
 आयतुल कुर्सी का अर्थ
 चार कुल की फ़ज़ीलत

Internal Link

सूरह इख़लास का अर्थ

आयतुल कुर्सी का अर्थ

External Reference (यदि आवश्यक हो)

कुरआन करीम – सूरह अल-फलाक (113)
सहीह अल-बुख़ारी – फ़ज़ाइलुल-कुरआन

निष्कर्ष

सूरह फलाक कुरआन की अत्यंत महत्वपूर्ण और बरकत वाली सूरह है। यह हमें सिखाती है कि हर प्रकार की बुराई, जादू, हसद और अंधकार से सुरक्षा केवल अल्लाह की पनाह में है। यदि इसे नियमित रूप से समझकर और ईमान के साथ पढ़ा जाए, तो यह अल्लाह की रहमत और हिफाज़त का महत्वपूर्ण ज़रिया बनती है।


अगर यह लेख "सूरह फलाक का अर्थ" आपको पसंद आया हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ ज़रूर शेयर करें ताकि अधिक से अधिक लोग कुरआन को समझकर पढ़ सकें।

Author. RahmatKiDua Team
Category. इस्लामी ज्ञान / Quran Sharif / सूरह का अर्थ

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

इस्तिखारा की दुआ (सलातुल इस्तिखारा) – अरबी, हिंदी अर्थ, पढ़ने का सही तरीका और फ़ज़ीलत

बीमार की अयादत की दुआ | मरीज से मिलने की दुआ अरबी, हिंदी, अर्थ और फ़ज़ीलत

वुज़ू से पहले और बाद की दुआ | अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ, हदीस और फ़ज़ीलत