सोने से पहले की मस्नून दुआ | अरबी, हिंदी अर्थ, फ़ज़ीलत और हदीस
सोने से पहले की मस्नून दुआ | अरबी, हिंदी अर्थ, हिंदी उच्चारण, हदीस, फ़ज़ीलत और पढ़ने का तरीका हर मुसलमान को अपने दिन की शुरुआत और अंत अल्लाह के ज़िक्र के साथ करना चाहिए। सोने से पहले पढ़ी जाने वाली यह मस्नून दुआ नबी ﷺ की सुन्नत है। यह दुआ अल्लाह पर भरोसा, उसकी हिफाज़त की उम्मीद और उसके ज़िक्र के साथ सोने की शिक्षा देती है। इस लेख में आप सोने से पहले की मस्नून दुआ का अरबी पाठ, हिंदी उच्चारण, हिंदी अर्थ, हदीस का संदर्भ, फ़ज़ीलत और इसे कब व कैसे पढ़ना चाहिए, इसकी पूरी जानकारी जानेंगे। अगर आप रोज़ाना इस मस्नून दुआ को पढ़ेंगे तो इंशाअल्लाह सुन्नत पर अमल होगा और अल्लाह तआला की रहमत, बरकत और हिफाज़त की उम्मीद रहेगी। इसलिए हर मुसलमान को सोने से पहले इस दुआ को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए। अरबी اللّٰهُمَّ بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا हिंदी उच्चारण अल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु वा अह्या। हिंदी अर्थ ऐ अल्लाह! मैं तेरे ही नाम के साथ सोता हूँ और तेरे ही नाम के साथ जागता हूँ। हदीस / क़ुरआन का संदर्भ यह दुआ हज़रत हुज़ैफ़ा (रज़ि.) और हज़रत अबू ज़र (रज़ि.) से रिवायत है कि जब ...

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