मस्जिद से निकलने की दुआ | अरबी, हिंदी उच्चारण, अर्थ, हदीस और फ़ज़ीलत

मस्जिद से निकलने की दुआ

बाहर निकलते समय यह दुआ ज़रूर पढ़ें

Arabic + Hindi + Meaning

मस्जिद अल्लाह का सबसे प्रिय घर है। जब कोई मुसलमान मस्जिद से बाहर निकलता है, तो उसे भी एक सुंदर दुआ पढ़ने की सुन्नत सिखाई गई है। इस दुआ में अल्लाह से उसके फ़ज़्ल (कृपा) की दुआ की जाती है।


अतिरिक्त पैराग्राफ

मस्जिद में प्रवेश और बाहर निकलने की दुआएँ हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन दुआओं को पढ़ने से हम हर काम की शुरुआत और समाप्ति अल्लाह की याद के साथ करते हैं, जो ईमान को मज़बूत बनाता है।


अरबी

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ


हिंदी उच्चारण

अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुका मिन फ़ज़्लिक


हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल (कृपा और नेमत) का सवाल करता हूँ।


हदीस का संदर्भ

यह दुआ सहीह मुस्लिम (हदीस: 713) में वर्णित है। रसूलुल्लाह ﷺ मस्जिद से निकलते समय यह दुआ पढ़ते थे।


फ़ज़ीलत

सुन्नत पर अमल होता है।
अल्लाह के फ़ज़्ल और बरकत की दुआ मिलती है।
मस्जिद से निकलते समय अल्लाह की याद बनी रहती है।
रोज़मर्रा के कामों में बरकत की उम्मीद रहती है।


कैसे पढ़ें / कब पढ़ें

मस्जिद के दरवाज़े से बाहर निकलते समय।

पहले बायाँ पैर बाहर रखें।

फिर यह दुआ पढ़ें।
दिल में अल्लाह पर भरोसा रखें।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. मस्जिद से निकलते समय कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?

उत्तर: "اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ"
Q2. यह दुआ किस हदीस में है?
उत्तर: सहीह मुस्लिम, हदीस 713।
Q3. क्या यह दुआ हर बार पढ़नी चाहिए?
उत्तर: जी हाँ, यह रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत है।


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निष्कर्ष

मस्जिद से निकलते समय यह छोटी लेकिन बेहद अहम दुआ पढ़ना रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत है। हर मुसलमान को इसे याद करके अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करना चाहिए ताकि अल्लाह का फ़ज़्ल और बरकत हासिल हो सके।

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