जुमे की फ़ज़ीलत | जुमे के दिन की अहमियत, सुन्नतें और दुआ

जुमे की फ़ज़ीलत और जुमे की नमाज़

जुमा मुसलमानों के लिए सबसे मुबारक दिनों में से एक है।

अल्लाह तआला ने जुमे के दिन को मुसलमानों के लिए ख़ास फ़ज़ीलत और बरकत वाला दिन बनाया है। इस दिन जुमे की नमाज़ अदा करना, दुरूद शरीफ़ पढ़ना, दुआ करना और नेक आमाल करना बहुत सवाब का काम है। जुमा ईमान वालों के लिए ईद जैसा मुबारक दिन है।


  विषय सूची

      जानकारी                                     विवरण

    📖 विषय                             जुमे की फ़ज़ीलत

     📘 स्रोत                              कुरआन और सहीह हदीस

      🕌 दिन                              शुक्रवार (जुमा)

⭐ मुख्य विषय                         जुमे की नमाज़, दुआ, दुरूद,

                                                फ़ज़ीलत


 अरबी टेक्स्ट

                   يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نُودِيَ لِلصَّلَاةِ مِنْ يَوْمِ الْجُمُعَةِ 

                                             فَاسْعَوْا إِلَىٰ ذِكْرِ اللَّهِ وَذَرُوا الْبَيْعَ



 हिंदी उच्चारण

या अय्युहल्लज़ीना आमनू इज़ा नूदिया लिस्सलाति मिन यौमिल जुमुअति फ़सअव इला ज़िक्रिल्लाहि व ज़रुल बैअ।


 हिंदी अर्थ

ऐ ईमान वालों! जब जुमे के दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाए तो अल्लाह के ज़िक्र की ओर दौड़ो और खरीद-फरोख्त छोड़ दो। यही तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते हो।


 संक्षिप्त तफ़्सीर

इस आयत में अल्लाह तआला ने जुमे की नमाज़ की अहमियत बयान की है। अज़ान होने के बाद दुनियावी कारोबार छोड़कर मस्जिद जाना और ख़ुत्बा ध्यान से सुनना हर बालिग़ मुस्लिम पुरुष पर फ़र्ज़ है।


 हदीस / कुरआन संदर्भ

कुरआन: सूरह अल-जुमुआ (62:9)

हदीस:

सबसे बेहतरीन दिन, जिस दिन सूरज निकला, वह जुमे का दिन है।

सहीह मुस्लिम


 फ़ज़ीलत

जुमा मुसलमानों की साप्ताहिक ईद है।

इस दिन दुआ की एक ऐसी घड़ी होती है जिसमें की गई दुआ क़ुबूल होती है।

जुमे के दिन दुरूद शरीफ़ पढ़ने की बहुत फ़ज़ीलत है।

जल्दी मस्जिद जाने वाले को अधिक सवाब मिलता है।

सूरह अल-कहफ़ पढ़ना मुस्तहब है।


 कब और कैसे पढ़ें

जुमे के दिन सुबह से अधिक से अधिक दुरूद शरीफ़ पढ़ें।

ग़ुस्ल करें, साफ़ कपड़े पहनें और खुशबू लगाएँ।

समय से पहले मस्जिद पहुँचें।

ख़ुत्बा ख़ामोशी से सुनें।

अल्लाह से खूब दुआ करें।


 महत्वपूर्ण बातें

जुमे की नमाज़ को बिना शरीअत के उज़्र के छोड़ना गुनाह है।

ख़ुत्बे के दौरान बात करना मना है।

जुमे के दिन नेकियों का सवाब बढ़ जाता है।


 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. जुमे के दिन कौन-सी सूरह पढ़ना बेहतर है?
उत्तर: सूरह अल-कहफ़ पढ़ना मुस्तहब है।

Q2. जुमे के दिन सबसे अफ़ज़ल अमल क्या है?
उत्तर: जुमे की नमाज़, दुरूद शरीफ़, दुआ और तिलावत।

Q3. क्या जुमा मुसलमानों की ईद है?
उत्तर: जी हाँ, हदीस में जुमे को मुसलमानों का साप्ताहिक 

        ईद का दिन बताया गया है।


 संबंधित लेख

➜ सूरह अल-कहफ़ की फ़ज़ीलत

➜ दुरूद शरीफ़ की फ़ज़ीलत

➜ जुमे की नमाज़ का तरीका


 आंतरिक लिंक

➜ सुबह के अज़कार

➜ शाम के अज़कार

➜ आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत


निष्कर्ष

जुमे का दिन रहमत, मग़फ़िरत और बरकत का दिन है। हर मुसलमान को चाहिए कि इस दिन की क़दर करे, जुमे की नमाज़ अदा करे, दुरूद शरीफ़ पढ़े, दुआ करे और नेक आमाल में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले।


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Author.  RahmatKiDua Team

Category.  इस्लामी ज्ञान / जुमा / हदीस / दुआ



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